पानीपत/जींद। सिविल सर्विस एग्जाम में जींद के हिमांशु जैन ने 44वां रैंक हासिल किया। उन्होंने अपने तीसरे अटेंप्ट में यह यूपीएससी क्लियर किया। इससे पहले एक बार 12 अंक से तो दूसरी बार 2 अंक से यूपीएससी क्लियर करने से रह गए थे। इस बार उन्होंने अपने वीक प्वाइंट पर काम किया और यूपीएससी क्लियर कर दिया। 35 मिनट चला था इंटरव्यू...
- हिमांशु ने बताया कि उसका इंटरव्यू लगभग 35 मिनट चला था। इंटरव्यू पैनल में 6 लोग थे, जिन्होंने 40 से 50 सवाल पूछे थे।
- सबसे रोचक सवाल पर बात करते हुए हिमांशु ने बताया कि उससे एक सवाल पूछा गया था कि टेक्नोलॉजी ने आदमी की जिंदगी को आसान बना दिया है या पेचीदा। हिमांशु ने जवाब दिया कि यह इस्तेमाल पर निर्भर करता है। अगर टेक्नोलॉजी संयमित तरीके से इस्तेमाल की जाए तो फायदेमंद है और असंयमित इस्तेमाल की जाए तो हानिकारक है।
22 लाख पैकेज की नौकरी छोड़ शुरू की थी यूपीएससी की तैयारी
- हिमांशु जैन ने अपनी पढ़ाई जींद से पूरी की इसके बाद आईआईटी, हैदराबाद से कंप्यूटर में एमटेक की। हिमांशु ने हैदराबाद में गूगल कंपनी में 22 लाख पैकेज में नौकरी ज्वायन कर ली थी, लेकिन आईएएस अफसर बनने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी में जुट गए।
- हिमांशु ने बताया कि उन्होंने 3 से 4 महीने कोचिंग ली लेकिन फिर दिल्ली में कमरा लेकर पढ़ाई की। हररोज 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे।
- इससे पहले को दो अटेंप्ट में उनके मेन एग्जाम में नंबर कम आए थे। इस वजह से उन्होंने अपने मेन एग्जाम की जमकर तैयारी की।
परिवार वालों ने नहीं टूटने दिया हौसला
- हिमांशु ने बताया कि उसके दो बार असफल होने के बाद भी परिवार वालों ने हौसला टूटने नहीं दिया। वे लगातार उसे प्रोत्साहित करते रहे। इसका ही नतीजा है जो यह एग्जाम पास हो सका।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥१॥ श्लोक अर्थ - जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चन्द्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर शङ्कर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही सम्पूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली माँ सरस्वती हमारी रक्षा करें। शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्। हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम् वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥२॥ श्लोक अर्थ - शुक्लवर्ण वाली, सम्पूर्ण चराचर जगत् में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिन्तन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों से भ...
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