नई दिल्ली
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कैंडिडेट्स को अब अलग-अलग परीक्षाओं के लिए फॉर्म भरने और एक ही दिन दो से ज्यादा एग्जाम के डेट टकराने जैसे झंझट से निजात मिलने वाली है। साथ ही सरकारी नौकरियों के लिए अलग-अलग एजेंसी से संपर्क करने की दिक्कत भी नहीं होगी।
केंद्र सरकार ने करोड़ों छात्रों को बड़ी राहत देने की पहल करते हुए परीक्षा लेने वाली सभी एजेंसियों को मिलाकर एक कॉमन एजेंसी बनाने का फैसला लिया है। यानी यूपीएससी, एसएससी, रेलवे बोर्ड या ऐसी तमाम दूसरी एजेंसियों का विलय कर एक बड़ा समूह बनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ करोड़ों स्टूडेंट्स को बहुत-सी दिक्कतों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि सरकार के लिए भी केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए परीक्षाएं आयोजित करने में ज्यादा पारदर्शी सिस्टम मिलेगा।
सूत्रों के अनुसार, इस बारे में नीतिगत सहमति हो गई है और अगले कुछ दिनों में इसका औपचारिक ऐलान हो जाएगा। हर साल अलग-अलग सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं में करीब 2 करोड़ युवा शामिल होते हैं, जिनमें से लगभग 60 से 70 हजार नौकरियां हर साल निकलती हैं
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥१॥ श्लोक अर्थ - जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चन्द्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर शङ्कर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही सम्पूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली माँ सरस्वती हमारी रक्षा करें। शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्। हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम् वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥२॥ श्लोक अर्थ - शुक्लवर्ण वाली, सम्पूर्ण चराचर जगत् में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिन्तन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों से भ...
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